Electric Car VS Petrol Car | Electric Car Working in Hindi | इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल कार में क्या अंतर होता है?

Electric Car VS Petrol Car, Electric Car Working in Hindi, इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल कार में क्या अंतर होता है?

इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल कार में अंतर क्या होता है? Electric Car VS Petrol Car

एक इलेक्ट्रिक कार (Electric Car) और पेट्रोल कार (Petrol Car) में क्या क्या अंतर होता है कुछ इन पांइट के जरिए समझने की कोशिश करेंगे। अगर आप इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बारे विस्तार से जानना चाहते हैं तो यह पोस्ट पढ़ें इलेक्ट्रिक व्हीकल की जानकारी हिंदी में

1. इंजन के वर्किंग मैकेनिज्म के आधार पर (Engine kaise kaam karta hai)

आइए जानते हैं दोनो के इंजन की बनावट और काम करने के तरीके बारे में-

इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल कार में अंतर क्या होता है? Electric Car VS Petrol Car
इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल कार में अंतर क्या होता है? Electric Car VS Petrol Car

इंजन के काम करने की प्रोसेस (Electric Car VS Petrol Car)

पेट्रोल या डीजल से चलने वाली कारो में जो इंजन लगे होते हैं उसे Internal Combustion (IC) इंजन  कहते हैं। इसमें पिस्टन का जो लीनियर मोशन होता है उसको क्रिएट किया जाता है। यानी की इंजन डायरेक्ट से रोटेट (घूमना) नही होता है। बल्कि इसे रोटेशन में बदला जाता है। यहाँ पेट्रोल या डीजल सिलेड्र में जाता है और जलता है फिर पिस्टन पर फोर्स बल पड़ता जिसे लीनियर मोशन पर रोटेशनल मोशन में बदला जाता है। जिससे इस इंजन की एफिसिएंसी 35% ही बचती है यानी की 1 लीटर पेट्रोल में 35 प्रतिशत ही पेट्रोल ही काम में आता है बाकी 65 प्रतिशत तो इंजन में लोस हो जाता है।

जबकि दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक कार में एक 3 फेज इंडक्शन मोटर (Three Phase Induction Motor) लगी होती है जो कि बहुत ही पावरफुल होती है। और सेल्फ स्टार्जिंग भी होती है। जब IC Engine को स्टार्ट करने के लिए किसी छोटे DC मोटर के द्वारा रोटेट कराया जाता है तब वर स्टार्ट होता है। लेकिन इंडक्शन मोटर जो इलेक्ट्रिक व्हीकल में लगा होता है वह स्वंय से रोटेट हो जाता है। जिससे इसकी एफिसियेंसी अच्छी होती है। इसमें पूरा पॉवर आउटपुट तक जाता है।

इंजन की पॉवर (Power of engine)

पेट्रोल-डीजल इंजन की RPM कम होती जो लगभग 6000-8000 RPM होती है। जो कि बहुत कम होती है इसलिए इस इंजन को डायरेक्ट व्हील से कनेक्ट नही करते बल्कि इसकी स्पीड को बढ़ाने के लिए पहले गेयरबाक्स ट्रांसमिशन का प्रयोग किया जाता है जिससे गाड़ी की स्पीड को कंट्रोल किया जाता है फिर Power Wheel तक जाता है।

जबकि इसके विपरीत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में जो इंडक्सन मोटर लगा होता है उसका RPM ही 18000 RPM होता है जिससे इसमें किसी भी प्रकार के गेयर बोक्स की जरूरत ही नही पड़ती है। लेकिन इसमें मोटर की स्पीड को कंट्रोल करने के लिए इनवर्टर का प्रयोग किया जाता है। इसमें गाड़ी को रिवर्स करने के लिए इनवर्टर का ही यूज किया जाता है। इनवर्टर की मदद से

गाड़ी को रिवर्स करना या रोकना

पेट्रोल-डीजल का इंजन केवल एक ही दिशा में घूमता है इसलिए गाड़ी को रिवर्स करने के लिए गेयर ट्रांसमिशन का यूज करना पड़ता है। तब गाड़ी को रिवर्स किया जाता है। जिससे इसका मैकेनिज्म काफी जटिल हो जाता है। तथा गाड़ी को ट्राफिक पर या किसी अन्य सिचुएशन पर अगर थोड़ी देर रोकना हो तो इसमें क्लच और न्यूट्रल होता है।

जबकि इलेक्ट्रिक इंडक्सन मोटर दोनो तरफ घूम सकता है। इसे गाड़ी में लगे इनवर्टर द्वारा फेज का कनेक्सन चेंज करके रिवर्स में घुमाया जा सकता है। जिससे इसको केवल सिंगल ट्रांसमिशन पर ही चलाया जा सकता है। इसे रोकने के लिए किसी भी प्रकार का क्लच नही होता है यह सिंगल पैडल की मदद से ही चलती है। Electric Vehicle में एक्लरेटर और ब्रेक दो ही पैडल दिया रहता है। इसमें किसी भी प्रकार का गेयर सिस्टम नही होता है।

एवरेज परफॉर्मेंस (Average Petrol car vs Electric car)

जब आप पेट्रोल-डीजल इंजन वाली कार को ज्यादा स्पीड पर भगाते हैं तो इसका एवरेज बिल्कुल ही खराब हो जाता है। इसकी एफिसिएंसी 15-20% ही रहेगी यानी IC इंजन टॉप स्पीड पर ज्यादा फ्यूल खाता है।

जबकि इलेक्ट्रिक कार में ऐसा नही होता है इंडक्शन मोटर को आप 18000 RPM पर रन कराने पर भी इसकी Efficiency 90% ही रहेगी। और 1000 RPM पर भी वही रहेगा। यानी की आप इसे चाहे 10 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलाओ या फिर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलाओ एवरेज लगभग सेम ही रहेगा।

इंजन का वजन और पावर आउटपुट (Engine weight and power output)

Internal Combustion Engine का वजन 180 kg पर Power 140 kW ही जनरेट हो रहा है। जबकि Induction Motor यानी इलेक्ट्रिक कार में इंजन का वजन 31.8 kg पर 270 kW Power जनरेट हो रहा है। यानी आप समझ सकते है कि IC Engine का वजन भी ज्यदा है और मिलने वाला आउटपुट भी बहुत कम है वही दूसरी तरफ induction motor वजन मे भी काफी कम है और आउटपुट भी डबल दे रहा है।

2. कॉस्ट के आधार पर (Based on Cost)

पेट्रोल-डीजल कार की कीमत इलेक्ट्रिक कार की अपेक्षा बहुत कम है ऐसा इसलिए है क्योंकि इलेक्ट्रिक कारों में कार को चलाने के लिए इंडक्शन मोटर का प्रयोग किया जाता है और मोटर करंट से चलती है। इसलिए इसमें उच्च क्वालिटी की लीथियम ऑयन (Lithium Ion) बैटरी का प्रयोग किया जाता है। जो कि काफी महगी आती है। जिससे इलेक्ट्रिक कार की प्राइस बढ़ जाती है। जितने की एक नार्मल कार आती है उतने की तो इलेक्ट्रिक कार की केवल बैट्री पैक ही आती है।

3. प्रदूषण (Pollution Petrol car vs Electric car)

पेट्रोल-डीजल इंजन काफी मात्रा में प्रदूषण छोड़ता है इसमें वायु प्रदूषण के साथ ही ध्वनि प्रदूषण होता है। और जब फ्यूल सही से नही जलता है तो जहरीला धुआं बहत ज्यादा निकलता है। जबकि इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) में इस तरह की कोई समस्या नही होती है। क्योंकि इसमें इलेक्ट्रिक मोटर लगा होता है जो कि न किसी प्रकार का प्रदूषण छोड़ता है और ना ही आवाज करता है। गाड़ी स्टार्ट करने पर कोई आवाज नही करता।

4. सर्विसिंग और मेंटेनेंस कास्ट (Servicing and Maintenance cost)

पेट्रोल-डीजल का इंजन में बहुत सारे मूविंग ट्रांसमिशन का प्रयोग किया जाता है जो कुछ समय बाद घिस जाते हैं जिससे इनकी समय-समय पर सर्विसिंग कराना जरूरी होता है। जिस बजह Internal Combustion Engine की मेंटीनेंस कास्ट इनक्रीज हो जाती है। जबकि दूसरी ओर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में इस प्रकार की झंझट ही नही होती है। इसमें सिंमल कांसेप्ट का यूज किया जाता है जिससे इसकी मेंटीनेंस कास्ट न के बराबर है।

5. रनिंग कॉस्ट (Running Cost)

एक पेट्रोल या डीजल कार एक लीटर फ्यूल में लगभग 15 से 25 किलोमीटर तक चल पाएगी यानी की 100 रूपये में केवल 15-25 किलीमीटर ही चलेगी। जबकि इलेक्ट्रिक कार 100 रूपमें में 150 से 200 किलोमीटर तक चलेगी। यानी की इलेक्ट्रिक कार को चलाने का खर्चा काफी कम है।

6. पेट्रोल पंप और चार्जिंग स्टेशन (Petrol pump and EV charging station)

जैसा की आप सभी जानते है कि पेट्रोल पंप हर जगह मौजूद है और एक गाड़ी में फ्यूल भरवाने में केवल 5 मिनट का समय ही लगता है। वही बात करें Electric Vehicles की तो इसे चार्ज करने के लिए अभी पर्याप्त मात्रा में चार्जिंग स्टेशन (Charging Station) उपल्ब्ध नही है। और एक 30W की बैटरी को फुल चार्ज करने में फास्ट चार्जिंग पर 1 घंटा और स्लो चार्जिंग पर लगभग 8 घंटे का समय लगता है। क्योंकि यह अभी बिल्कुल नई टेक्नोलॉजी पर आधारित कान्सेप्ट है तो इससे अभी काभी सुधार करने की आवश्यता भी है। और समय के साथ इसका विकास भी हो रहा है।

इलेक्ट्रिक कार में गियर बॉक्स क्यों नहीं होता है?

Electric car में Gear box नहीं होता है क्योंकि इसमें लगे इंडक्सन मोटर ही काफी ज्यादा स्पीड और टार्क जनरेट करता अतः इसमें गियर बॉक्स की आवश्यक्ता नही होती है।

इलेक्ट्रिक कार में क्लच क्यों नहीं होता है?

Electric vehicles में क्लच पैडल नहीं लगा होता है क्योंकि इसमें इसकी जरूरत ही नही पड़ती है। क्लच की आवश्यकता इसलिए पड़ती है की पेट्रोल-डीजल इंजन को चालू रखने के लिए उसे लगातार घूमते रहना होता है। और इस तरह से पॉवर पहियों तक जाता रहेगा अतः इंजन से पहिए के बीच में क्लच को लगाया जाता है ताकि इंजन से आने वाले पॉवर (रोटेशन फोर्स) को पहिया तक पहुचने से रोका जा सके। और गाड़ी को स्टार्ट इंजन में भी रोका जा सके।

इलेक्ट्रिक कार महँगी क्यों आती है?

इलेक्ट्रिक कार के महंगी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण उसमें लगाई जाने वाली बैटरी होती है। क्योंकि इसमें लीथियम ऑयन की बैट्री लगाई जाती है जो कि काफा महंगी है।

क्या इलेक्ट्रिक कार पेट्रोल कार से हल्की होती है?

जी नही इलेक्ट्रिक कार पेट्रोल कार से भी भारी होती है इसकी बैटरी के कारण इसका वजन बढ़ जाता है।

Electric Car VS Petrol Car इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल कार में अंतर क्या होता है? आपने इस पोस्ट में देखा उम्मीद करता हूँ आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी।

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