इलेक्ट्रिक गाड़ियों में किस तरह की बैटरी का उपयोग किया जाता है? | इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को जोड़कर क्यों बनाया जाता है? | Electric vehicle battery

इलेक्ट्रिक गाड़ियों में किस तरह की बैटरी का उपयोग किया जाता है? | इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को जोड़कर क्यों बनाया जाता है? Electric vehicle battery charging time.

इलेक्ट्रिक गाड़ियो में किस तरह की बैटरी का उपयोग किया जाता है? (Electric vehicle battery)

इलेक्ट्रिक गाड़ियों (Electric vehicles) को चलाने के लिए बैटरी पैक का यूज किया जाता है। पर क्या आपको पता है कि इसमें किस तरह की बैटरी का प्रयोग किया जाता है। तो दोस्तों इलेक्ट्रिक गाड़ियों को पॉवर देने के लिए लीथियम ऑयन बैटरी (Lithium ion battery) को इस्तेमाल में लाया जाता है। क्योंकि यह अन्य बैटरी के मुकाबले ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी को स्टोर कर सकती है और लंबे समय तक स्टोर कर के रखती है।

Lithium ion battery

इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी पैक को बनाने के लिए हजारों छोटी बैटरी को आपस में जोड़कर तैयार किया जाता है। जिस तरह किसी रिमोट में छोटे-छोटे सेल लगे होते है ठीक उसी तरह की लीथियम ऑयन (Lithium ion) सेल भी होते हैं। एक कार को चलाने के लिए कम से कम हजार सेल को जोड़कर एक बड़ा बैटरी पैक बनाया जाता है। जिससे एक इलेक्ट्रिक कार को भरपूर मात्रा में पॉवर मिल सके। अब सवाल यह है कि इतनी सेल को जोड़कर क्यों बैटरी पैक बनाया जाता है। एक साथ ही क्यों नही बना दिया जाता है।

इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को जोड़कर क्यों बनाया जाता है? (Lithium ion battery pack electric vehicle)

तो ऐसा करने की पीछे दो कारण है पहला यह है कि बैटरी चार्ज करने पर या उसका यूज करने पर वह गर्म होती है। और यदि एक साथ काफी बड़ी बैटरी को कार मे फिट किया जाए तो इससे बैटरी हीट होकर ब्लास्ट भी हो सकती है। इसलिए इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को छोट-छोटे सेल को सिरीज व पैररल में जोड़कर एक बड़ा बैटरी पैक बनाया जाता है ताकि बैटरी की हीट को कम किया जा सके। और दूसरा कारण यह है कि इससे बैटरी की लाइफ साइकिल भी बढ़ जाती है। इसके साथ ही गाड़ी मैकेनिकली बैलेंस रखने भी मदद मिलती है।

इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी को चार्ज करने में कितना टाइम लगता है (Electric vehicle battery charging time)

बैटरी की कैपीसिटी के हिसाब से उन्हे चार्ज होने भी अलग-अलग समय लगता है। टाटा की नेक्सोन ईवी (Nexon  EV) को नार्मली चार्ज करने पर 8 घंटे लगते हैं और फास्ट चार्ज करने पर 60 मिनट लगते है और फुल चार्ज होने पर यह 300 किलोमीटर की रेंज को कवर करती है। ऐसा कंपनी का कहना है लेकिन ऑन रोड पर लोगो को 220 से 250 तक का ही रेंज मिल पाता है।

अगर बात करे टेस्ला कार की तो एक बार चार्ज करने पर 400 किमी. और हायर वर्ज़न की कार 518 किलोमीटर तक जा सकती है। और वही इसकी चार्जिंग टाइम 8.5 घंटे से 20 घंटे तक हो सकती है। तथा 15 मिनट के फास्ट चार्ज पर यह 250 किलोमीटर तक जा सकती है। Tesla model 3 में 60Kwh की लीथियम आयन बैटरी लगाई गई है। और इसकी कीमत 55 लाख से 75 लाख तक हो सकती है।

उम्मीद करता हूँ की अब आप को पता चल गया होगा की इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी को जोड़कर क्यों बनाया जाता है। और इससे क्या-क्या फायदा होता है। इसके साथ ही हमने जाना की इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने में कितना समय लगता है। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आती है तो इसे दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले, हमारे Blog Hindi Electric Vehicle पर अपना कीमती समय बिताने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

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